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ये उन सभी के लिए जो पाकिस्तान से युद्ध और सर्जिकल स्ट्राइक की बात कर रहे है, कृपया पूरा पढ़ें

हमे पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक या फिर पाकिस्तान के साथ युद्ध कर देना चाहिए?

क्या पाकिस्तान से युध्ध ही एकमात्र विकल्प है

गुरुवार 14 फरवरी को हुए आत्मघाती हमले में हमने अपने 44 जवान खो दिए, वो बहादूर अपने देश के लिए शहीद हो गए. इस दुखद घटना ने पूरे देश को मानो सुन्न कर दिया, पूरी दुनिया इस हादसे से दुखी है और भारत तो जैसे सदमे में है.

लोगो में उन आतंकियों और पाकिस्तान के लिए गुस्सा साफ़ नजर आ रहा है, पूरा देश शहीद जवानों का बदला चाहता है, कहीं सर्जिकल स्ट्राइक की बात हो रही है तो कोई कह रहा है पाकिस्तान से युद्ध कर देना चाहिए.

पर क्या हमारे पास अब युध्ध ही एक विकल्प बचा है, क्योकि युध्ध केवल विनाश लाता है. आप अपने एसी कमरों में बैठ कर स्मार्टफ़ोन हाथ में लिए सोशल मीडिया में ये बात बड़ी आसानी से कह देते है की हमे पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक या फिर पाकिस्तान के साथ युद्ध कर देना चाहिए.

कुछ लोग इस दुखद घडी में भी अपनी राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहे, लोगो ने आतंकवाद का मजहब बताना शुरू कर दिया है. मजहबी बातें कर के लोगो के गुस्से की आग में अपने फायदे की रोटी सकने में लगे है.

ये सुनने में बड़ी कायरता वाली बात लगाती है, परन्तु युद्ध ही केवल एक हल नहीं है. युद्ध का परिणाम उस माँ से पूछिए जिन्होंने अपना बेटा ऐसे ही किसी युद्ध या फिर आतंकी हमले में खोया है, युद्ध के बाद क्या होता है ये उस बच्चे से पूछिए जिसके पिता युद्ध से तो लौटे मगर तिरंगे में लिपटकर.

पुलवामा में हुए उस आतंकी हमले में हमें सिर्फ वो गुनहगार दिख रहे है जिन लोगो ने इस घटना को अंजाम दिया. परन्तु CRPF की गाडिया कब जाएँगी, किस रास्ते से जायेगी, कहाँ हमला कर सकते है, ये सब निजी जानकारी आतंकियों तक पहुंची कैसे? जब इतनी बड़ी संख्या में सेना जा रही है तो उनको हवाई सुरक्षा क्यों नहीं दी गयी?

सवाल तो हर भारतीय के मन में है

इस तरह के सवाल सभी के मन में आ रहे है, कुछ गद्दार है जो इस देश में रहकर ही अपने देश को बेच रहे है. पहले हमें उन्हें ख़त्म करना चाहिए. जो देश की निजी जानकारी आतंकियों तक पहुंचा रहे है उनका पता लगाना है, बाहर से लोग मजबूर और बेचारे बनकर हमारे देश में शरण लेते है और बाद में इस देश का ही नुकसान करतें है हमें उन्हें देश में आने से ही रोकना है.

देश के युवा जो की इन आतंकियों की बातों में फंस रहे है हमने उन्हें बचाना है. हमें हिन्दू-मुसलमान की राजनीती से बाहर आना है. आतंकी हमें बांटना ही चाहते है हमें एक रहना है.

कोई भी व्यक्ति ये नहीं चाहेगा कुछ नीच आतंकियों की वजह से एक जवान एक जवान पर गोली चलाये. पुलवामा में हुए उस हादसे से हमें सीख लेनी चाहिए जो गलतिया हुई उनमें सुधर करना चाहिए.

मुझे भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है, वो फिर से ऐसा कुछ इस देश में नहीं होने देगी. और वैसे भी देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह जी ने ये कहा ही है “इंक़लाब हथियारों से नहीं विचारों से आएगा”. अपने गुस्से पर थोडा काबू रख कर इस बारें में विचार करें.

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